Saturday, 26 June 2021
Friday, 21 May 2021
Sunday, 16 May 2021
Random#5
ये फ़ासलां जो हमारे दरम्यान रह गया है
छलक आये है आँशु, पैमाना भर गया है
सिर्फ वक्त है जो मुसलसल चल रहा है
मैं ठहर गया हूँ, और तू भी ठहर गया है
Tuesday, 20 April 2021
Random#4
ज़िन्दगी यूँ गुजर रही है
जैसे आइना फर्श पे बिखर रहा हो
लहूँ अश्क बनकर उतर रहा हो
परिंदा पिंजड़े में मचल रहा हो
जंगल खुद अपनी आग में जल रहा हो
बेवक्त मौसम बदल रहा हो
कोई काटों पर जैसे चल रहा हो
कोई गिर रहा हो और संभल रहा हो
रात उजाले को निगल रहा हो
रेत हाथों से फिसल रही हो
बर्फ सर्दियों में पिघल रही हो
ज़िन्दगी यूँ गुजर रही है
जैसे वो ज़िन्दगी न होकर ग़ज़ल रही हो
Thursday, 4 March 2021
Random#3
अगर अब मैं आइना देखूँ
तो मुझे क्या दिखाई देगा?
कैद पड़े अश्कों को
इन आखों से कौन रिहाई देगा?
यह जो मैं चीख रहा हूँ
क्या वह दूर तक कहीं सुनाई देगा?
क्या मेरा ज़मीर मेरे बेगुनाह होने की
साफ लहजों में गवाही देगा?
Saturday, 2 January 2021
Friday, 1 January 2021
Saturday, 27 June 2020
Random#2
Monday, 6 January 2020
Random#1
जैसे जून के महीने में
खेतों में गिरी बारिश की बूँदे
और मैं
जैसे किसान के चेहरे
पर आयी मुस्कराहट
या फिर
दिसंबर के महीने में
सूरज ने धीमे
से जैसे हँस दिया हो
और मैं खिड़की को
खोल उस रोशनी
को पकड़ने की ताक में
देर तक ठहरा हुआ हूँ
Thursday, 8 August 2019
खामोशियां
Friday, 27 October 2017
देवदास
Wednesday, 6 September 2017
और मैं सोचता हूँ कि मैं सच देखता हूँ
Friday, 1 September 2017
"कविता और कविता"
Monday, 7 August 2017
शायद
Sunday, 12 March 2017
पता नहीं क्यों
Thursday, 23 February 2017
Sunday, 22 January 2017
जनतंत्र दिवस
Sunday, 25 September 2016
कल्पना
Monday, 5 September 2016
अदला बदली भूमिकाओं की
अदला बदली भूमिकाओं की(एक प्राइमरी शिक्षक का दर्द)
Monday, 22 August 2016
कुछ शिकायते, कुछ नाराजगी, थोड़ी हसरते भी
Sunday, 17 July 2016
कुछ कहना है तुमसे
हमें क्या बनना है, क्या करना है सब कुछ
जब उससे दूर जाता हूँ
Saturday, 2 January 2016
उम्मीद
Wednesday, 21 October 2015
बिहार चुनाव
Thursday, 28 May 2015
नई शुरुआत
Tuesday, 5 May 2015
चंद लफ़्ज
Monday, 16 March 2015
रिश्ता
Friday, 6 March 2015
परिवर्तन
Tuesday, 3 March 2015
गुजारिश
Wednesday, 25 February 2015
प्यार
Thursday, 29 January 2015
नया साल
Thursday, 4 December 2014
यादें
Saturday, 15 November 2014
दीवाली
बचपन
भरोसा
Monday, 22 September 2014
शाम
सवाल
१४ सितम्बर
आज फिर
गंगा
Tuesday, 2 September 2014
लावारिश बच्चे
Random #38
इतना तो सचमुच में समझदार बनना था मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...
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जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी कोई हमें देख मुस्कराया.....
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ये इतफ़ाक था कि होता हुआ हादसा टल गया वरना सूरज पागल न था ,जो शाम से पहले ढल गया उसने कसम खाई थी इंतजार की रात तक रात जल्दी हुई और उ...
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मंजिल कहाँ है, सफर क्या है? उदास क्यों हो, हुआ क्या है? सभी हैं बंद कमरों में यहाँ मैं पूछता हूँ माजरा क्या है? सब पाकर भी ढूंढता है कुछ ...









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