Saturday, 2 January 2021
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Random #38
इतना तो सचमुच में समझदार बनना था मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...
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जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी कोई हमें देख मुस्कराया.....
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ये इतफ़ाक था कि होता हुआ हादसा टल गया वरना सूरज पागल न था ,जो शाम से पहले ढल गया उसने कसम खाई थी इंतजार की रात तक रात जल्दी हुई और उ...
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मंजिल कहाँ है, सफर क्या है? उदास क्यों हो, हुआ क्या है? सभी हैं बंद कमरों में यहाँ मैं पूछता हूँ माजरा क्या है? सब पाकर भी ढूंढता है कुछ ...
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