आज फिर एक बेहयाई ने खींच लायी है
कहने को मिलन हैं,फिर भी जुदाई है
ये राहे सफर ने हमको कहाँ ला खड़ा किया
देखो न मिलने की ये कैसी रूत आई है
दिल के अरमान टूट न जाये भला
तुम उधर खफा हो और इधर रूसवाई है
जरा गौर कर इस ज़माने की नजर को
हर आँखों ने एक नयी सुरूर पायी है
हो मुव्वकल उस बदरी पर जो दिलों पे छायी है
आज फिर एक बेहयाई ने खींच लायी है
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