Tuesday, 2 September 2014

खुद को रोकता क्यों है?

मुझसे न हो पायेगा ऐसा तू सोचता क्यों है?

अगर है तुझमे काबिलियत तो खुद को रोकता क्यों है?

गिरते वहीं हैं जो चलने का हौसला रखते हैं

चलते वहीं हैं जो जीतने का फैसला करते हैं

गिरने का मतलब तो हारना नहीं होता

जीतने के लिए चलना होता है बस रुकना नहीं होता

तू उठ चल शुरुआत तो कर

हार से ही सही एक बार मुलाकात तो कर

हारने के बाद तुझे जीत की तलाश होगी

हर घडी बस तुझे जीत की ही प्यास  होगी

फिर तू खुद को आत्मविश्वास से लबरेज पायेगा

तू काँटों भरा रास्ता नहीं फूलों का सेज पायेगा

हर दिन हर घडी हर रात फिर तेरी होगी

इस चाँद ने ये चाँदनी तुझपे बिखेरी होगी

जिंदगी तेरी है ये तू दूसरों को देखता क्यों है?

अगर है तुझमे काबिलियत तो खुद को रोकता क्यों है?

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