Saturday, 3 February 2024
Sunday, 17 December 2023
Random #27
घर हूँ इसलिए है उसके लौट आने की उम्मीद
दूर होकर भी वही फिर पास आने की उम्मीद
सब खोकर भी खड़ा है कोई पेड़ गर हू-ब-हू
होगी ही फिर नए पते पनप आने की उम्मीद
परिंदे को है तिनके की, जिस शिद्दत से तलाश
उसको भी तो होगी फिर आशियाने की उम्मीद
एक आवाज़, जो जंगलों को चीरकर आती रही
बेबसी में भी मौजूद थी जीत जाने की उम्मीद
उसके टूटने से ये जो टूट गए हैं लोग सब
Monday, 11 December 2023
Random #26
उसकी बेबाक हँसी और तकती हुई आँखे मेरी
मायूस हो जाये तो फिर रुक जाये सांसे मेरी
बिखेर दे जुल्फें तो फिर शामो-सहर बहार चले
रौशन सी फिज़ा और सदा रौशन रही रातें मेरी
सुर्ख होठों की नज़ाकत से यूँ मदहोश शमा.....
उससे मिलने की तलब और बेचैन निगाहें मेरी
चूम ले जख्मों को तो फिर मरहम क्या है ?
उसकी नाज़ुक बाँहों को थामे हुई बाहें मेरी
उसकी तारीफ़ में लिखा हुआ हर हर्फ़ है पाकीज़ा
ग़ज़ल क्या है...उससे जुड़ी हुई सब यादें मेरी
Tuesday, 8 August 2023
Random #25
क्या होता है चराग़ जलते रहने का अंज़ाम आखिर
ज़िन्दगी है भी तो चलते रहने का ही नाम आखिर
सफ़र खत्म हुआ, मुंतजिर रहे फिर भी, तो समझे
मुकम्मल होना नहीं है ज़ुस्तज़ू का मक़ाम आखिर
क्यूँ न करते रहे हम सहर का इन्तिज़ार यूँ ही
खत्म तो होती होगी धुंधली सी ये शाम आखिर
जब हम बज़्म से होकर गुजरे तो हमने ये जाना
सभी तो हैं इसी रंग-ओ-रस के गुलाम आखिर
इस आज़ार से गुजरते हुए इतना हैरान क्यूँ हो
यही होता है ऐसी रूहानियत का इनाम आखिर
Monday, 10 July 2023
Random #24
वो सवाल, जो है मेरी ज़िन्दगी का सवाल
सब पाकर भी रह गया तिश्नगी का सवाल
एक फूल जिसे जुदा कर दिया गुलशन से
हर वक्त पूछता रहता है ताज़गी का सवाल
जिस सवाल का कोई जवाब था ही नहीं
वो सवाल भी क्या, सिर्फ़ सादगी का सवाल
कभी गर मिलेगा ख़ुदा तो फिर पूछूंगा मैं
कोई जवाब है भी या फिर बंदगी का सवाल
जिसके सुपुर्द कर रखी थी ये दुनिया मैंने
उसके लिया मैं था सिर्फ़ दिल्लगी का सवाल
सब्र करते हुए ये उम्र गुजर जाएगी यूँ ही
चुप रहना आखिर है तो संजीदगी का सवाल
Tuesday, 9 May 2023
Random#23
ये सच है कि कुछ बचा नहीं है अब
सब तेरे जैसा है बस तू नहीं है अब
हर शाम सूरज डूबता है वैसी ही
चाँद जमीं पर उतरता नहीं है अब
घर बसने कहने को ही घर है
इस घर में कोई रहता नहीं है अब
रस्म है जो निभाई जा रही है यूँ ही
कोई आता है तो ठहरता नहीं है अब
कोई टूट कर इस कदर बिखरा है
किसी के लिए भी सवंरता नहीं है अब
Saturday, 15 April 2023
Random#22
मैं तो सब कह दूँ लेकिन ….तुम कहते हो कि तुम समझते हो
आँखें बयाँ करती हैं सबकुछ..बिन बोले भी सब समझते हो ?
चुप रहना क्यों जरूरी है और क्यों जरूरी है दूर हो जाना ?
सब इत्तिफ़ाक़ की बातें हैं..मैं समझता हूँ कि तुम समझते हो
है एक दुनिया और.. तुम्हारे रुख़्सार, तुम्हारे तबस्सुम से आगे
तुम भी दुनिया थे, ये भी दुनिया है..ये फ़ासला तुम समझते हो
तुम्हारी बातों में एक लज्ज़त थी, तुम सच बोलते थे लेकिन
कहना ही सब नहीं होता, तुम जो कहते थे वो समझते हो
हमारे दरम्याँ जो कुर्बत थी, हमें था दूर होना ही एक दिन
यही दुनिया की रिवायत है, मैं जानता हूँ तुम समझते हो
Saturday, 17 December 2022
Random#21
Sunday, 28 August 2022
Random#20
जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी
नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी
किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी
कोई हमें देख मुस्कराया...तेरी याद आयी
कंधे पे रख दिया हाथ तो तेरी याद आयी
आईने में खुद को देखा तो तेरी याद आयी
नाम सुना तेरे शहर का तो तेरी याद आयी
खिड़की से किसी ने झाँका तेरी याद आयी
सहर से शाम का वक्त हमने यूँ बिताया
तू याद आयी... और बहुत ही याद आयी
Saturday, 27 August 2022
Random#19
इन आंसूओं को अंगार बनाना होगा
मुझे इस तरह सब कुछ भुलाना होगा
सब पूछेंगे इस नए चेहरे का राज मुझसे
लेकिन मुझे वो पुराना शख्स गँवाना होगा
सीने में चल रही इस कश्मकश को
अब मुझे छोड़ दूर कही जाना होगा
इस नए दौर में मैं नया बनाऊंगा खूद को
रोने गिड़गिड़ाने का कोई और जमाना होगा
दिन-ब-दिन रंग बदलती हुई इस दुनिया को
मुझे भी कभी तो अपना रंग दिखाना होगा
लोग ढूंढेंगे कहाँ गया वो उदास सा शख्स
मैं बोलूंगा मर गया होगा आशिक़ दीवाना होगा
दरख्तों पर लटक रही इन तमाम यादों को
परत दर परत जल धुआं बन जाना होगा
इन लोगों से दूर कहीं वीरान से जंगल में
इस नए परिंदे का एक छोटा सा ठिकाना होगा
जब मैं कहूंगा तब उन्हें आना होगा
जब मैं कहूंगा तब उन्हें जाना होगा
इस बदले हुए शख्स का राज़ बताना होगा
मैं कौन हूँ दुनिया को दिखाना होगा
हर लहू के कतरे को बीज बन जाना होगा
जो कुछ भी हो नया जन्म ले आना होगा
चलना होगा गिरना होगा उठ दौड़ जाना होगा
ख़ुद से ही लड़ना होगा ख़ुद को ही हराना होगा
Friday, 26 August 2022
Random#18
ख़ुद को गुनाहगार ठहरा ख़ुद को तस्सली दे रहा हूँ
हर किसी के हिस्से का जुर्म मैं अपने सर ले रहा हूँ
ये किस तरह का ताल्लुक था किसी का मेरे साथ
उसने दूर जाने को कहा और मैं और पास हो रहा हूँ
मैं जानता था सब कुछ सौंप देने का अंज़ाम लेकिन
ये क्या है कि मैं हर हर्फ़ से एक ग़ज़ल पिरो रहा हूँ
यूँ नहीं है कि उसके जाने से टूट गया मैं
अब किसी का नहीं हो पाउँगा मैं इसलिए रो रहा हूँ
मैं हूँ तन्हाई है और यादों का ये बोझ
क्या बचा है मेरे पास किसके लिए संजो रहा हूँ
Random#17
कितना मुश्किल होता है खुद को माफ़ कर देना
किसी को यूँ अपनी ज़िन्दगी से आज़ाद कर देना
सब कुछ भूलकर भी सब कुछ याद करते रहना
और यूँ अपनी पूरी ज़िन्दगी को नाशाद कर देना
मुस्कराकर मिलना सबसे.......बातें करते रहना
अपने बीते हुए कल को इस तरह मिस्मार कर देना
अपनी सारी कोशिशों को टूटकर बिखरते हुए देखना
कोई पूछे जब ग़म का सबब तो दरकिनार कर देना
इस आज़ार से बाहर निकलना यूँ तो नहीं मुमकिन
अगर मुमकिन हो तो यूँ करना मुझे बर्बाद कर देना
Thursday, 4 August 2022
Random#16
एक लड़की है जिसके रूठ जाने से जीवन खाली सा लगता है
सब लगता है बिखरा हुआ, वक़्त भारी सा लगता है
याद आता है उसका चेहरा, उसकी आँखें , उसकी बातें
कटता नहीं दिन काटने से, गुजरती ही नहीं रातें
सोचता हूँ उसके गुस्से को कैसे शान्त कर पाउँगा
सोचता हूँ कुछ भी करके आज उसे मनाऊँगा
वह जो बोलेगी हर बात उसकी मान लूँगा मैं
हद से गुजर जाना है यह भी ठान लूँगा मैं
जो भी हो वह मेरी है मुझे इतना नहीं सताएगी
जब सामने आ जाऊँगा मैं वह गले आ लग जाएगी
थोड़ा रोएगी, मारेगी मुझे फिर गले आ लग जाएगी
कितना प्यार करती है मुझे, फिर मुझे बताएगी
उसको अपनी बाँहों में भर माथें को चुम लूँगा मैं
उसकी बाँहों में बँधकर आकाश झूम लूँगा मैं
Thursday, 28 July 2022
Random#15
ये फ़ासला जो हमारे दरम्यां रह गया है
छलक आये हैं आंसू पैमाना भर गया है
सिर्फ वक़्त है जो मुसल्सल चल रहा है
मैं ठहर गया हूँ और तू भी ठहर गया है
एक परिंदा ऊँचा उड़ने की ख़्वाहिश में
अपना घर छोड़ किसी दूसरे शहर गया है
सब कहते थे जिस शख़्स को पत्थर का
वह पत्थर आज टूट के बिखर गया है
कभी चलता था जज्बातों का सिलसिला
अब लब खामोश हैं, अल्फ़ाज़ मर गया है
Friday, 1 July 2022
Saturday, 9 April 2022
Random#14
मंजिल कहाँ है, सफर क्या है?
उदास क्यों हो, हुआ क्या है?
सभी हैं बंद कमरों में यहाँ
मैं पूछता हूँ माजरा क्या है?
सब पाकर भी ढूंढता है कुछ
ऐसे में फिर मिला क्या है?
होता है ऐसे ही दुनिया में
फिर किसी से भी गिला क्या है?
तुम्हे गुमाँ है अपनी वफ़ादारी का
इन सारी वफाओं का सिला क्या है?
Random#13
जब कभी हम तेरे शहर आए
अश्क़ आँखों में उतर आए
लौट के यूँ तेरी याद आयी
जैसे शाम के बाद सहर आए
तेरी खुशबू ने यूँ छुआ मुझको
फूल हवाओं में बिखर आए
ये गलियाँ यूँ बुलाती हैं मुझे
जैसे लौट के कोई घर आए
निगाहें फिरती रहती हैं दर-बदर
तू कहीं दूर से नजर आए
कौन?
ये किसकी ताबीर पड़ गयी मुझपे, किसका तराना गुनगुनाता हूँ
ये कौन है मेरे ख्यालों में, किसकी इबादत के गीत गाता हूँ
किसको आवाज़ दे रहा हूँ मैं, कौन है जिसे बुलाता हूँ
कौन रहता है साथ मेरे, किसकी यादों में खोया जाता हूँ
ये किस तरह का रिश्ता है, किस ओर खींचा जाता हूँ
बैठा हूँ अकेला जब कभी, किसको साथ अपने पाता हूँ
सर झुकाया है जब कभी सजदे में, किसे खुदा से माँग लाता हूँ
किसके ख़्वाब के हिस्से अपने ख़्वाब में सजाता हूँ
किसके तबस्सुम मे खोकर सारे दर्द भूल जाता हूँ
किसकी आँखों की गहराई मे डूबा-डूबा जाता हूँ
किसके आने की आहट से रातों को चौंक जाता हूँ
सपना नहीं हकीकत है, ये कहानी जो मैं सुनाता हूँ
Thursday, 17 February 2022
Saturday, 28 August 2021
Random#11
अब ये प्यार, ये दर्द मुझसे दुबारा नहीं होगा
हो गया भी गर तो सारा का सारा नहीं होगा
तू बुला रहा था तो ले आ गया हूँ मैं तेरे पास
बस इसलिए कि तेरा कोई सहारा नहीं होगा
मैं तुझसे बात भी कर लूँ तो अब वो बात नहीं
मैं झूठ बोलूंगा और तुझे वो गवारा नहीं होगा
मैं आया हूँ पर लौट जाने की तैयारी के साथ
पता है...तेरी तरफ से कोई इशारा नहीं होगा
ये सब झूठ है जो अब तक कह रहा था मैं
मैं तो कब्र से लौट आऊं तूने पुकारा नहीं होगा
Sunday, 15 August 2021
Random#10
ये किसकी तासीर पड़ गई मुझपे, तराना किसका गुनगुनाता हूँ
ये कौन है मेरी कहानी में.......किसकी इबादत के गीत गाता हूँ
Wednesday, 11 August 2021
Random#9
अगर तू ख्वाब है तो ये रात यूँ ही रहने दे
तू जा रहा है..जा..अपनी याद यूँ ही रहने दे
मेरा तुझ पे इख़्तियार यूँ तो कुछ भी नहीं
जो कुछ भी है मगर बात..बात यूँ ही रहने दे
तेरी नवाज़िश का शौक अब मैं नहीं रखता
गर बच गया हो लिहाज़..लिहाज़ यूँ ही रहने दे
अब वो उल्फ़त वो अहद-ए-वफ़ा ना रही
बच गया है जो दिल-ए-नाशाद..यूँ ही रहने दे
तेरी क़ुर्बत में कहीं मैंने खो दिया खुद को
तेरा तबस्सुम है मुझे याद..याद यूँ ही रहने दे
Friday, 9 July 2021
गर बोलूँ तो रुस्वाई है
टूट रहे हैं शाख से पत्ते, चल रही हवा पुरवाई है
न बोलूँ तो जुर्म है मेरा, गर बोलूँ तो रुस्वाई है
बड़े दिनों की याद फिर लौट के वापस आई है
सोच रहा..है ये सपना, हकीकत है, परछाई है ?
होने को है क़यामत जैसे ले रहा वक्त अंगड़ाई है
ऐसे मिलना भी क्या मिलना इससे अच्छी तो जुदाई है
हँसना रोना सभी मना है, कैसी किस्मत पाई है?
जिस रूह से भाग रहा वो मुझमे ही सिमट आयी है
भींग रही है धरती सारी......काली बदरी छाई है
बैठा हूँ महफ़िल में लेकिन सारी दुनिया की तन्हाई है
Thursday, 1 July 2021
Random#8
अपने तस्सवुर में तुझे छू आने का सफ़र
कैसा दिलकश था तुझे पा जाने का सफ़र
इससे पहले कि लोग हिज्र के किस्से कहे
तय कर लेने दे वस्ल की राहत का सफ़र
न रोक मुझे लिख लेने दे किस्सा-ए-दिल
अब ख़त्म होने को है मेरी चाहत का सफ़र
मैं चाहता हूँ इन रास्तों पे कुछ निशान रहें
हो जाएँ आसां आते जाते राहगीरों का सफ़र
कोई पूछ रहा है कीमत इस नादानी का
मैं कहता हूँ अच्छा रहा जैसा भी था सफ़र
Saturday, 26 June 2021
Friday, 21 May 2021
Sunday, 16 May 2021
Random#5
ये फ़ासलां जो हमारे दरम्यान रह गया है
छलक आये है आँशु, पैमाना भर गया है
सिर्फ वक्त है जो मुसलसल चल रहा है
मैं ठहर गया हूँ, और तू भी ठहर गया है
Tuesday, 20 April 2021
Random#4
ज़िन्दगी यूँ गुजर रही है
जैसे आइना फर्श पे बिखर रहा हो
लहूँ अश्क बनकर उतर रहा हो
परिंदा पिंजड़े में मचल रहा हो
जंगल खुद अपनी आग में जल रहा हो
बेवक्त मौसम बदल रहा हो
कोई काटों पर जैसे चल रहा हो
कोई गिर रहा हो और संभल रहा हो
रात उजाले को निगल रहा हो
रेत हाथों से फिसल रही हो
बर्फ सर्दियों में पिघल रही हो
ज़िन्दगी यूँ गुजर रही है
जैसे वो ज़िन्दगी न होकर ग़ज़ल रही हो
Thursday, 4 March 2021
Random#3
अगर अब मैं आइना देखूँ
तो मुझे क्या दिखाई देगा?
कैद पड़े अश्कों को
इन आखों से कौन रिहाई देगा?
यह जो मैं चीख रहा हूँ
क्या वह दूर तक कहीं सुनाई देगा?
क्या मेरा ज़मीर मेरे बेगुनाह होने की
साफ लहजों में गवाही देगा?
Saturday, 2 January 2021
Friday, 1 January 2021
Saturday, 27 June 2020
Random#2
Monday, 6 January 2020
Random#1
जैसे जून के महीने में
खेतों में गिरी बारिश की बूँदे
और मैं
जैसे किसान के चेहरे
पर आयी मुस्कराहट
या फिर
दिसंबर के महीने में
सूरज ने धीमे
से जैसे हँस दिया हो
और मैं खिड़की को
खोल उस रोशनी
को पकड़ने की ताक में
देर तक ठहरा हुआ हूँ
Thursday, 8 August 2019
खामोशियां
Friday, 27 October 2017
देवदास
Wednesday, 6 September 2017
और मैं सोचता हूँ कि मैं सच देखता हूँ
Friday, 1 September 2017
"कविता और कविता"
Monday, 7 August 2017
शायद
Sunday, 12 March 2017
पता नहीं क्यों
Thursday, 23 February 2017
Sunday, 22 January 2017
जनतंत्र दिवस
Sunday, 25 September 2016
कल्पना
Monday, 5 September 2016
अदला बदली भूमिकाओं की
अदला बदली भूमिकाओं की(एक प्राइमरी शिक्षक का दर्द)
Monday, 22 August 2016
कुछ शिकायते, कुछ नाराजगी, थोड़ी हसरते भी
Sunday, 17 July 2016
कुछ कहना है तुमसे
हमें क्या बनना है, क्या करना है सब कुछ
जब उससे दूर जाता हूँ
Saturday, 2 January 2016
उम्मीद
Wednesday, 21 October 2015
बिहार चुनाव
Thursday, 28 May 2015
नई शुरुआत
Tuesday, 5 May 2015
चंद लफ़्ज
Monday, 16 March 2015
रिश्ता
Friday, 6 March 2015
परिवर्तन
Tuesday, 3 March 2015
गुजारिश
Random #38
इतना तो सचमुच में समझदार बनना था मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...
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जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी कोई हमें देख मुस्कराया.....
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ये इतफ़ाक था कि होता हुआ हादसा टल गया वरना सूरज पागल न था ,जो शाम से पहले ढल गया उसने कसम खाई थी इंतजार की रात तक रात जल्दी हुई और उ...
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मंजिल कहाँ है, सफर क्या है? उदास क्यों हो, हुआ क्या है? सभी हैं बंद कमरों में यहाँ मैं पूछता हूँ माजरा क्या है? सब पाकर भी ढूंढता है कुछ ...










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