Sunday, 7 July 2024

Random #33

 हमने ये कब चाहा कि वो हमारा सोचें 

डूबने वालों को लाज़िम है किनारा सोचें 


मसरूफ़ियत की दौर में किसे फुर्सत है 

वो तुमको सोचें और फिर दोबारा सोचें 


ख़ुद की काबिलियत पर नाज़ किए बैठे हैं 

वो भी रंज से गुजरें तो फिर सहारा सोचें 


दिल से सोचने वाले इतना नहीं सोचा करते 

दिमाग वाले हैं जो नफ़ा और ख़सारा सोचें 


ये सोचने का सिलसिला है दुनिया वालों का 

किसी को नकारा सोचें, किसी को आवारा सोचें 


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Random #38

 इतना तो सचमुच में समझदार बनना था  मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था  लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने  कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...