Monday, 6 May 2024

Random#30

 सब तजुर्बें, सारे सबक, हैं मेरे करीब क्यूँ

नहीं थे दस्तरस में तो फिर ऐसे शरीक क्यूँ 


राज़ क्या, थी बात क्या, क्यूँ हुए थे आशना 

मैं तो बस हैरान हूँ, थे इतने करीब क्यूँ 


वो ज़ुस्तज़ू, वो नवाज़िशें, हसरतें, वो चाहतें 

फिर इन सभी के बीच में आता नसीब क्यूँ 


इत्तिफ़ाक़ है, है हादसा या कि कोई ख़्वाब है 

अब किसी भी बात का नहीं आता यकीन क्यूँ 


तुम तो आफताब थे, तुम से थी ये रौशनी 

तुम नहीं शरीक क्यूँ, तुम नहीं करीब क्यूँ 




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Random #38

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