इतना तो सचमुच में समझदार बनना था
मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था
लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने
कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था
जिस शिद्दत से रहा तलबगार दुनिया का
इस दुनिया को मेरा तलबगार बनना था
चारागरों के बीच में रख छोड़ना था जब
मुझको तो फिर ज़ेहनी बीमार करना था
रस्मे-वादा ताउम्र निभाने की चीज है
ये सोच कोई वादा मेरे यार करना था