Friday, 9 July 2021

गर बोलूँ तो रुस्वाई है

 टूट रहे हैं शाख से पत्ते, चल रही हवा पुरवाई है 

न बोलूँ  तो जुर्म है मेरा, गर बोलूँ तो रुस्वाई है 


बड़े दिनों की याद फिर लौट के वापस आई है

सोच रहा..है ये सपना, हकीकत है, परछाई है ?


होने को है क़यामत जैसे ले रहा वक्त अंगड़ाई है 

ऐसे मिलना भी क्या मिलना इससे अच्छी तो जुदाई है 


हँसना रोना सभी मना है, कैसी किस्मत पाई है?

जिस रूह से भाग रहा वो मुझमे ही सिमट आयी है 


भींग रही है धरती सारी......काली बदरी छाई है

बैठा हूँ महफ़िल में लेकिन सारी दुनिया की तन्हाई है 

Thursday, 1 July 2021

Random#8

अपने तस्सवुर में तुझे छू आने का सफ़र

कैसा दिलकश था तुझे पा जाने का सफ़र  


इससे पहले कि लोग हिज्र के किस्से कहे 

तय कर लेने दे वस्ल की राहत का सफ़र


न रोक मुझे लिख लेने दे किस्सा-ए-दिल 

अब ख़त्म होने को है मेरी चाहत का सफ़र 


मैं चाहता हूँ इन रास्तों पे कुछ निशान रहें

हो जाएँ आसां आते जाते राहगीरों का सफ़र


कोई पूछ रहा है कीमत इस नादानी का 

मैं कहता हूँ अच्छा रहा जैसा भी था सफ़र    



Random #38

 इतना तो सचमुच में समझदार बनना था  मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था  लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने  कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...