रास्तें में कोई ऐसा शजर होता
आने-जाने वालों का घर होता
सब रूकते छावँ की तलाश में
कितना आसान ये सफर होता
परिंदा पिंजड़े को तोड़ उड़ता
कहीं ऐसा भी एक मंजर होता
आसमां नीचे होता, जमीं ऊपर
दरिया में गिर रहा समंदर होता
तलवारें म्यान में वापस जाती
सामने झुका हुआ सर होता
दिलों में बस रहे ये लोग होते
गांव में बसा एक शहर होता