Saturday, 3 February 2024
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Random #38
इतना तो सचमुच में समझदार बनना था मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...
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जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी कोई हमें देख मुस्कराया.....
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चलते हुए सड़क के साथ साथ देखा एक दृश्य कोताहल भरा सड़क के उस पार फुटपाथ पर बच्चों को लुढ़कते हुए थे खास...
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इतना तो सचमुच में समझदार बनना था मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...