Friday, 21 May 2021
Sunday, 16 May 2021
Random#5
ये फ़ासलां जो हमारे दरम्यान रह गया है
छलक आये है आँशु, पैमाना भर गया है
सिर्फ वक्त है जो मुसलसल चल रहा है
मैं ठहर गया हूँ, और तू भी ठहर गया है
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Random #38
इतना तो सचमुच में समझदार बनना था मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...
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जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी कोई हमें देख मुस्कराया.....
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होठ सुर्ख थे जेठ की दोपहर की दीवार की तरह अश्कों से बारिश भी जिसे भींगा नहीं पाया चीख निकली थी पर गले तक अटकी इन फैले हाथों को थाम...
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एक लड़की है जिसके रूठ जाने से जीवन खाली सा लगता है सब लगता है बिखरा हुआ, वक़्त भारी सा लगता है याद आता है उसका चेहरा, उसकी आँखें , उसकी बाते...
