Sunday, 28 August 2022

Random#20

 जब भी हम बैठे तन्हां बस तेरी याद आयी 

नींद से यूँ चौंक उठ बैठे...तेरी याद आयी 


किसी ने आवाज़ दी तो... तेरी याद आयी 

कोई हमें देख मुस्कराया...तेरी याद आयी


कंधे पे रख दिया हाथ तो तेरी याद आयी 

आईने में खुद को देखा तो तेरी याद आयी 


नाम सुना तेरे शहर का तो तेरी याद आयी 

खिड़की से किसी ने झाँका तेरी याद आयी 


सहर से शाम का वक्त हमने यूँ बिताया 

तू याद आयी... और बहुत ही याद आयी 


Saturday, 27 August 2022

Random#19

 इन आंसूओं को अंगार बनाना होगा 

मुझे इस तरह सब कुछ भुलाना होगा 


सब पूछेंगे इस नए चेहरे का राज मुझसे 

लेकिन मुझे वो पुराना शख्स गँवाना होगा 


सीने में चल रही इस कश्मकश को 

अब मुझे छोड़ दूर कही जाना होगा 


इस नए दौर में मैं नया बनाऊंगा खूद को 

रोने गिड़गिड़ाने का कोई और जमाना होगा


दिन-ब-दिन रंग बदलती हुई इस दुनिया को 

मुझे भी कभी तो अपना रंग दिखाना होगा 


लोग ढूंढेंगे कहाँ गया वो उदास सा शख्स 

मैं बोलूंगा मर गया होगा आशिक़ दीवाना होगा 


दरख्तों पर लटक रही इन तमाम यादों को 

परत दर परत जल धुआं बन जाना होगा 


इन लोगों से दूर कहीं वीरान से जंगल में 

इस नए परिंदे का एक छोटा सा ठिकाना होगा 


जब मैं कहूंगा तब उन्हें आना होगा 

जब मैं कहूंगा तब उन्हें जाना होगा 


इस बदले हुए शख्स का राज़ बताना होगा 

मैं कौन हूँ दुनिया को दिखाना होगा 


हर लहू के कतरे को बीज बन जाना होगा 

जो कुछ भी हो नया जन्म ले आना होगा 


चलना होगा गिरना होगा उठ दौड़ जाना होगा 

ख़ुद से ही लड़ना होगा ख़ुद को ही हराना होगा 

Friday, 26 August 2022

Random#18

 ख़ुद को गुनाहगार ठहरा ख़ुद को तस्सली दे रहा हूँ

 हर किसी के हिस्से का जुर्म मैं अपने सर ले रहा हूँ 


ये किस तरह का ताल्लुक था किसी का मेरे साथ

उसने दूर जाने को कहा और मैं और पास हो रहा हूँ 


मैं जानता था सब कुछ सौंप देने का अंज़ाम लेकिन 

ये क्या है कि मैं हर हर्फ़ से एक ग़ज़ल पिरो रहा हूँ 


यूँ नहीं है कि उसके जाने से टूट गया मैं

अब किसी का नहीं हो पाउँगा मैं इसलिए रो रहा हूँ


 

मैं हूँ तन्हाई है और यादों का ये बोझ

क्या बचा है मेरे पास किसके लिए संजो रहा हूँ 

Random#17

 कितना मुश्किल होता है खुद को माफ़ कर देना 

किसी को यूँ अपनी ज़िन्दगी से आज़ाद कर देना 


सब कुछ भूलकर भी सब कुछ याद करते रहना 

और यूँ अपनी पूरी ज़िन्दगी को नाशाद कर देना 


मुस्कराकर मिलना सबसे.......बातें करते रहना 

अपने बीते हुए कल को इस तरह मिस्मार कर देना 


अपनी सारी कोशिशों को टूटकर बिखरते हुए देखना 

कोई पूछे जब ग़म का सबब तो दरकिनार कर देना 


इस आज़ार से बाहर निकलना यूँ तो नहीं मुमकिन 

अगर मुमकिन हो तो यूँ करना मुझे बर्बाद कर देना 


Thursday, 4 August 2022

Random#16

एक लड़की है जिसके रूठ जाने से जीवन खाली सा लगता है 

सब लगता है बिखरा हुआ, वक़्त भारी सा लगता है 


याद आता है उसका चेहरा, उसकी आँखें , उसकी बातें 

कटता नहीं दिन काटने से, गुजरती ही नहीं रातें 


सोचता हूँ उसके गुस्से को कैसे शान्त कर पाउँगा 

सोचता हूँ कुछ भी करके आज उसे मनाऊँगा


वह जो बोलेगी हर बात उसकी मान लूँगा मैं 

हद से गुजर जाना है यह भी ठान लूँगा मैं 


जो भी हो वह मेरी है मुझे इतना नहीं सताएगी 

जब सामने आ जाऊँगा मैं वह गले आ लग जाएगी 


थोड़ा रोएगी, मारेगी मुझे फिर गले आ लग जाएगी 

कितना प्यार करती है मुझे, फिर मुझे बताएगी 


उसको अपनी बाँहों में भर माथें को चुम लूँगा मैं 

उसकी बाँहों में बँधकर आकाश झूम लूँगा मैं  

Random #38

 इतना तो सचमुच में समझदार बनना था  मुझे भी थोड़ा बहुत अदाकार बनना था  लेकर ढोते हुए सभी जुर्मों को सर अपने  कभी तो सचमुच में गुनाहगार बनना था...